चीन के चीनियों को चीनी की तरह चाय में घोल कर पी सकते हैं हम

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चीन के चीनी यों को चीनी की तरह चाय में घोल कर पी सकते हैं हम

 संस्था के निजी कार्यक्रम में शामिल मोदी जी से पूछे गए प्रश्न

narender modi
narender modi

कल मोदी जी किसी संस्था के निजी कार्यक्रम में आमंत्रित थे, जब मोदी जी मंच पर थे, तो वहां उपस्थित पदाधिकारियों ने मोदी जी से ढ़ोकलाम विवाद और चीन के चीनी यों पर मोदी जी की राय पूछी, साथ ही भारतीय सेना की तैयारियों के बारे में पूछामोदी जी ने इस मसले पर अपनी राय को वहां उपस्थित जनता तथा पदाधिकारियों को विस्तार से बताया। पेश है मोदी जी के मंच से दिए वक्तव्य के कुछ अंश।

अपने आप को क्या समझता है चीन ?

Xi Jinping
Xi Jinping china president

मोदी : ये जो चीन है ना,अच्छा मित्रों, नाम तो सुना ही होगा चीन का ? नहीं -नहीं, मैं इसलिए पूछ रहा था कभी किसी ने, नाम भी ना सुना हो इस चीन का। ये वही चीन है जो पाकिस्तान को, अपने बाप से लड़ने के लिए हथियारों की सप्लाई करता है, और हर रोज उससे पम्प मारता रहता है की, जा अपने बाप को छेड़। इससे पहले ये चीन भी, 2 बार छेड़ चूका है, पाकिस्तान के बाप को। पहली बार की सबको पता है, नेहरू ने क्या किया था, उसको बताने की मुझे जरूरत नहीं है। हाँ दूसरी बार की मैं जरूर बताना चाहूंगा, की 67 में भी चीन ने भारत पर हमला किया था। तब भारत के सैनिकों ने, चीन के चीनीयों को ऐसे पटक के मारा था, जैसे कोई बाज, किसी चूहे को, पटक पटक के मारता है। तब ये ही चीनी, अपनी दुम, कुत्ते की तरह दबाकर भाग गए थे।

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50 साल बाद अब भोकना शुरू हुआ है चीन

सभा में उपस्थित मित्रों, 50 साल, 50 साल बाद, अब जाकर चीनीयों की कुछ हिम्मत हुई है की वे भारत को दांत दिखा सके। 1967 के सदमे से निकलने में चीनीयों को 50 साल लग गए। लेकिन 2 महीने हो चुकें, अब भी, वहां दूर बीजिंग में बैठे भौंक रहें है, हर रोज, नए नए तरह के ड्रामें कर रहें है।

चीन की उछल कूद

आप लोगों ने बन्दर तो देखें होंगे ना, देखें है की नहीं, कैसे बन्दर पूरा दिन, एक पेड़ के कभी ऊपर, तो कभी नीचे, चक्कर लगाता रहता है, अब उस बन्दर की मेहनत में कोई कमी है क्या ? नहीं है ना, कमी हो तो बताओ। लेकिन उस उछल कूद से कुछ होता है क्या ? नहीं होता ना, होता हो तो बताओ। उसी तरह ये चीनी भी, कभी इस पहाड़ी से उस पहाड़ी पर, तो कभी दूसरी से तीसरी पहाड़ी पर उछल कूद करते रहतें है। उछलता तो राहुल भी है, लेकिन उसे वोट मिलते हैं क्या ? ये राहुल और चीन दोनों एक जैसे हैं। इनकी कोई सुनता है क्या ? हाहा…… दोनों की ही कोई नहीं सुनता। हाँ,… कुछ है, दोनों की ही सुनने वाले जिनको ये सुनने के लिए पैसे देतें है।

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हमारी ताकत

मित्रों, हमारी ताकत, हमारे देश के सवा सौ करोड़ देशवासी है, हमारे देश में 32 राज्य है, और हर राज्य में ऐसी कई कई क्षत्रिय जातियां है जिनका इतिहास हज़ारों साल का है, जब उन घरों के बच्चे देश की सेना में भर्ती होते है, और जब वे अपने अपने घरों से देश सेवा के लिए निकल रहे होते हैं तो पता है उनके परिवार वाले, उनके गाँव वाले, उनकी पत्नी, बच्चे, बहन- भाई और माता- पिता सब के सब, क्या कहतें हैं। देश के लिए जा रहे हो, कभी पीठ मत दिखाना, गोली खानी पड़े, तो छाती पर खाना, गोली अगर पीठ पर खाई, तो सब कायर कहेंगे और हमारा खून मिटटी में मिल जाएगा, जब तक, तेरे शरीर में खून का एक कतरा भी शेष रहे और जब तक एक दुश्मन भी जिन्दा रहे, तू हार नहीं मानेगा। हम शहीद के परिवार वाले कहलाना पसद करेंगे। और कायर कहलाने से अच्छा, तो मरजाना पसंद करंगे। ये हमारी ताकत है। जब हमारी सेना को हथियार नहीं दिए गए थे, तब हमारे वीरों ने हार नहीं मानी, अब की सोच के देखो, वे चीनीयों के साथ क्या क्या करेंगे।

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कुछ समय पहले कुछ खबरें आयी थी, की भारत के पास 10 दिन से ज्यादा के, युद्ध के हथियार और गोला बारूद नहीं है। मुझे एक बात समझ नहीं आती, की हथियारों का हिसाब किताब लगाने वालों ने, अपने उत्तर प्रदेश वालो के हथियारों का हिसाब किताब क्यों नहीं लगाया, जहां हर गाँव में कई कई हथियारों की फैक्ट्रियां हैं, जहां के हथियार, चीन के बने हथियारों से, सौ गुना अच्छे हैं। चीनी समान का तो सभी को पता है, चल जाए तो चाँद तक, नहीं तो शाम तक, अब बताओ भाइयों, मैं ठीक कह रहा हूँ की नहीं कह रहा हूँ। चीन का माल कभी चलता भी है क्या ? सेना के पास तो जो हथियार हैं, वो तो रखे ही रह जाएंगे। युद्ध तो हम अपने देशी टैलेंट से ही जीत जाएंगे।

4 – 4 फुट के चीनी

sikh regiment
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इन चार चार फुट के चीनीयों ने कभी हमारे सरदार जी देखें है क्या ? जो कहते भी यही है सवा लाख से एक लड़ाऊं, तब गुरु गोविन्द सिंह नाम कहाऊं। हरियाणा के जाट देखें है कभी, जिन्होंने पानीपत के तीसरा युद्ध को जितने वाले लूटेरे, अब्दाली को भी वापस लूट लिया था। जिनके नाम और आवाज का खौफ आधे भारत में माना जाता है। राजपूत, मराठे, यादव ,मीणा , नागा ना जाने कितने अनगिनत योद्धा जातियों के किस्से प्रसिद्ध है। अब वे चार चार फुट के चीनी ये सोचते है की वो भारत को हरा सकते है या डरा सकतें है। ये तो उनकी गलतफैमी है, हम उन चीनीयों को चीनी की तरह चाय में मिला कर पी जाएंगे  किसी को पता भी नहीं चलेगा , वे कहाँ से आये थे, कहाँ चले गए।

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