सेक्युलरिज्म (धर्मनिरपेक्षता ) के ठेकेदारों बहुत हो गया अब तो समझ जाओ।

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कड़वी सचाई | gandhi ka chashma |जलता-पंचकूला
जलता-पंचकूला

पंचकूला की घटना का सबसे बड़ा कारण- धर्मनिरपेक्ष भारत

राम रहीम : भारत की धर्मनिरपेक्षता का फल

राम रहीम ने 15 साल पहले क्या किया था, वो सबको पता है। अब जब की 15 साल बाद, अदालत ने न्याय करते हुए अपना फैसला सुना दिया है, तो अब उसके अंधे भक्त क्या कर रहें है, ये भी पुरे देश ने देख लिया। करोड़ों की सम्पत्ति का देश को नुकसान उठाना पड़ा देश को, वो भी एक व्यक्ति के कारण।

प्रशनो के उत्तर

ज्यादातर प्रश्नो के उत्तरों को कोई सुन्ना या जानना भी नहीं चाहता है क्योकि इनके उत्तर काफी कठोर मार्मिक है, साथ में हमारी सोच और आवश्यकता की देन है।

  • अब प्रश्न ये हैं की :-

    1. आखिर कैसे एक व्यक्ति को इतना मौका मिला की वो सरकार के समानांतर अपनी सत्ता खड़ी कर सके ?
    2. कैसे लाखों लोग इन नकली धर्म गुरुओं की बातों में आकर उनके चुंगल में फस जातें है ?
    3. लाखों अनुयायिओं की भीड़ में सबसे ज्यादा नौजवान ही क्यों है ?
    4. नौजवान बेरोजगारी का रोना रोते हैं फिर भी बाबा के दरबार पर सबसे ज्यादा चढ़ावा वही चढ़ाते है क्यों, कैसे, किसलिए ?
    5. देखने में आता है की बाबा हजारों – लाखों करोड़ की प्रॉपर्टी इकट्ठी कर लेते है। जबकि ज्यादातर भक्त तो गरीब और बेरोजगार है, कैसे ?
    6. आखिर क्यों इन जैसे बाबाओं को रोका नहीं जा सका है आज तक ?
    7. भारतीय लोगो के जीवन में क्यों इनको इतना महत्व दिया जाता है ?

हमारा समाज:

हमारा इतिहास दुनिया में सबसे पुराना तथा सबसे समृद्ध है। हमारे समाज में एक होड़ सी मची है, एक दूसरे के सिर के ऊपर पैर रख कर आगे बढ़ने की, जब आगे बढ़ने के लिए किसी को रास्ता नहीं मिलता या किसी को सहयोग नहीं मिलता, तो ये समाज और समाज वाले उसको बताते है क्या करें, वे कहतें है, उस बाबा जी के पास जा, वो ही तेरी सभी समस्याओं का निवारण करेंगे, हमें भी यही समस्याएं थी। बाबा के पास जाने से सारी समस्याएं हल हो गयी, सारी तकलीफें दूर हो गयी, ये हो गया, वो हो गया, तरह तरह की बातें करते है, और बाबा के पास भेज देतें है। इसलिए सबसे बड़ा कसूरवार तो हमारा समाज ही है, जो आँखे बंद करके इन पर विश्वास करता है, और अपनी पत्नियों और बेटियों तक को इन भूखे कुत्तों के सामने भेज देतें है नोचने के लिए?

कड़वी सच्चाई

हमारी सरकार:

समाज के बाद दूसरी कसूरवार हमारी सरकारें जो इनको इतना फलने फूलने देती हैं, और चुनाव आने पर वोटों के लिए इनका समर्थन लेती है जिसके ये और ज्यादा शक्तिशाली हो जातें है। सरकार इन्हें प्रॉपर्टी खरीदने में छूट देती, जब की रोक लगानी चाहिए। इनकी इनकम, टैक्स फ्री कर देती है, जब की इनके ऊपर ५० % टैक्स लगाया जाना चाहिए, क्योकि ये पैसे अपनी कमाई से नहीं, जनता को ठग कर हासिल करते हैं। ये नेता सबसे पहले जा कर इनके पैरों में बैठते है, जिससे जनता के बीच में उनका कद सातवें आसमान तक बढ़ जाता है। सरकार इन्हें अपने साम्राज्य खड़ा करने का मौका देती है। फिर जब कुछ गलत हो जाता है तो इनके यही किले तोड़ने में 10 दिन लग जातें है, और सैकड़ों की जान से हाथ धोना पड़ता है। सरकार इनको बढ़ने से पहले ही रोक दें तो ये निरंकुश हो कर इस तरह का व्यवहार नहीं सकेंगे।

हमारा सविंधान : धर्मनिरपेक्ष और मतनिरपेक्ष

धर्मनिरपेक्षता ) के ठेकेदार,

दरअसल हमारा सविंधान ही इन सब को इजाजत देता है, जिससे सरकार, पुलिस, सेना, कोर्ट सबके हाथ बंधे हुए है। क्योकि भारत के सविंधान में भारत एक धर्मनिरपेक्ष और मतनिरपेक्ष देश कहा गया है, मतलब हर व्यक्ति को धार्मिक आजादी है, साथ में कुछ भी मानने की आजादी है। कोई भी अपना नया मत चला सकता है। अपना नया धर्म खड़ा कर सकता है, और किसी की कोई रोक टोक नहीं सकता, कोई प्रतिबंध नहीं, बदले में कोई विरोध भी करें तो सरकार, कोर्ट, पुलिस सब उनकी जान के पीछे पड़ जातें है। आखिर धार्मिक स्वतंत्रता का मामला जो बन जाता हैयही अधिकार कारण है जम्मू और कश्मीर की समस्या का। यही अधिकार कारण है देश में हिन्दू मुस्लिम दंगों का।

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हमारी धार्मिक परिवृत्ति :

हमारे देश से ज्यादा शायद ही किसी देश में धार्मिक आस्थावान लोग होंगे। यहां जन्म से लेकर मृत्यु तक सभी कार्य धार्मिक रीतिरिवाजों से किये जातें है। यहां के शास्त्रों में, मानव जीवन का उद्देश्य धर्म, अर्थ, काम. मोक्ष बतलाया गया है। धर्म ,अर्थ और काम की सिद्धि तो सभी की पूर्ण हो जाती है, लेकिन मोक्ष की प्राप्ति के लिए एक जरिया सभी को चाहिए होता है। इसी मोक्ष के ठेकदार ये बाबा लोग बन बैठते है। सभी बाबा एक ही बात बोलते हैं मैं ही तेरी नैया पार लगवा सकता हूँ, बाकी सब झूठे है,मेरी शरण में आजा, मैं ही एक सच्चा हूँ। ये कारण है जो हम लोग इन बाबाओं के चुंगल में फस जातें है।
सच्चा कोई मिलता नहीं और झूठा कोई छोड़ता नहीं।

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देश में बेरोजगारी तथा गरीबी :

देश में पसरी पड़ी गरीबी और बेरोजगारी भी इन बाबाओं की तरफ भोली भाली जनता को जाने के लिए मजबूर कर देती है, उन लोगों को ये बाबा आशा की एक उम्मीद दिखाई देतें है, की क्या पता बाबा ही कोई चमत्कार करदे। इन बाबाओं के पास जाकर, वे कुछ समय के लिए अपना दुःख दर्द समस्याएं चिंताएं भूल जाते है। उनको लगने लगता है की ये बाबा की मेहरबानी है, वास्तव में, ये कुछ समय बिना टेंशन के रहने से उसकी आत्मा से उपजी शक्ति होती है, जो उन्हें सभी समस्याओं से निकाल लाती है और उन्हें लगता है बाबा की चमत्कारी शक्ति का असर है

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एक बार सविंधान में भारत को धार्मिक देश घोषित करो। देश में दो धर्म हों, पहला राष्ट्र धर्म- दूसरा वेदो (इंसानियत) का धर्म, जो सत्य हो और जिससे सबका भला होता हो, वो धर्म है बाकी, अधर्म हो। फिर चाहे वो हिन्दू हो मुस्लिम हो सिख हो ईसाई हो या और कुछ भी।

कुछ लोंगो के निजी स्वार्थ :

बाबा को बाबा बनाने वाले, उसको प्रमोट करने वाले, कुछ व्यापारी लोग भी होते है, जिनका यही बिजनेस है, किसी अच्छे बोलने वाले, जिसके माथे में तेज हो और जो लोगों को अपनी बातों से प्रभावित कर सकने वाला हो, को एक बाबा की तरह प्रमोट करते है उसके कार्यकर्मों का आयोजन करवाते है, जनता के सामने फर्जी दान दिलवाते हैं, बाबा के चमत्कारों के झूठे बखान कराते है जब जनता गुमराह होकर दान देने लगती है, तो फिर अपना अपना हिस्सा आपस में बाट लेते हैं।
इन बातों का पता कभी भी भोली भाली जनता को नहीं चल पाता। और इस तरह कुछ स्वार्थी लोग एक नए बाबा का सृजन कर देते है इसका उदहारण राधे मां के रूप में सबके सामने है।

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