गांधी का चश्मा एक राजनीतिक घटनाओं व बयानों पर हास्य व्यंग्य, तीखी प्रतिक्रिया, राजनीतिक घटनाओं के पीछे के सच का विश्लेषण करता है। अथवा देश के नागरिकों से जुड़े सामाजिक परिप्रेक्ष्य के मुद्दों पर अपने स्वतंत्र विचार रखता है। देश व समाज की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विदेशी टिप्पणियों का भी जवाब अपने अलग अंदाज में देने का प्रयत्न हम लगातार कर रहे हैं।

AAKASH DABAS
AAKASH DABAS

जब हमने गांधी का चश्मा पर काम करना शुरू किया तो स्पष्ट था कि आज का भारत न तो महात्मा गांधी का भारत है और ना ही सरदार पटेल का भारत है, न ही नेताजी सुभाष चंद्र बोस के सपने का और सावरकर के सपने तो बहुत ही पीछे रह गए।आज का भारत आम आदमी का भारत है और वह आदमी नेताओं को देखकर क्या सोचता है और उस आदमी को देखकर नेताजी क्या सोचते हैं बस यही है गांधी का चश्मा- AAKASH DABAS

Arya Anuj Choudhary
Arya Anuj Choudhary

गांधी का चश्मा का उद्देश्य व्यक्तियों को राजनीतिक जागरुक बनाकर उन्हें पारदर्शी शासन व्यवस्था व सामाजिक जवाबदेही जैसे गंभीर विषयों के प्रति पर जागरूक बनाना है। – Arya Anuj Choudhary