मोदी शाह की दोस्ती

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नरेंद्र मोदी अमित शाह दोस्ती

आज भारतीय राजनीति की दो ही धुरी हैं। एक नरेंद्र मोदी और दूसरे अमित शाह, इन दोनों ने मिलकर इस प्रकार से भारतीय राजनीती में उलटफेर किये है। कांग्रेस को क्या करना चाहिए उनके रणनीतिकारों को मालूम ही नहीं है।

कहतें है राजनीति में कोई सगा नहीं होता, तो आखिर क्या कारण  है की दोनों में इतनी घनिष्ट मित्रता का। क्या ये दोनों सच में राष्ट्र के लिए समर्पित हैं या इनकी देशभक्ति में कोई स्वार्थ छिपा है, जिस कारण से ये दोनों मित्र हैं।

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नरेंदर मोदी यात्रा

हर किसी को पता है मोदी वडनगर के एक गरीब घर में पैदा हुए व संघर्ष करते हुए आगे बढ़े, RSS में ABVP गुजरात का काम देखते हुए अपनी कौशलता का परिचय दिया, पहले गुजरात बीजेपी का संगठन कार्य देखते हुए केशुभाई पटेल को मुख्यमंत्री बनाया, फिर भाजपा राष्टीय संगठन का काम देखते हुए 2001 में गुजरात के मुख़्यमंत्री बने व 2014 में भारी जन समर्थन के साथ वो आज देश के प्रधानमंत्री पद तक पहुंच चुके हैं।

अमित शाह यात्रा

अमित शाह मुंबई में एक धनी जैन बनिया परिवार में पैदा हुए, बचपन से ही संघ की शाखाओं में जाते थे। 1982 में संघ कार्यक्रम में ही नरेंदर मोदी से मिले1983 में ABVP से जुड़े व नरेंदर मोदी से एक साल बाद 1986 में वह भाजपा में शामिल हो गए। 1987 में  BJYM में वार्ड मंत्री, फिर मंडल मंत्री, प्रान्त मंत्री व प्रान्त उपाध्यक्ष तक पहुंचते हुए 1997 के उप चुनाव में गुजरात विधानसभा पहुंचे व बाद में गुजरात के गृहमंत्री रहे और आज भाजपा के राष्टीय अध्यक्ष है। नरेंदर मोदी के पीछे खड़े सबसे मजबूत व बुद्धिमान रणनीतिकार हैं।

आप सब बेसब्री से इन्तजार कर रहे होंगे इनके सफर का आइये जानते है कुछ रोचक बातें।

कड़वी सच्चाई

नरेंद्र मोदी अमित शाह पहली मुलाक़ात

RSS प्रचारकों को जाना जाता है अपनी तीव्र बुद्धिउच्च रणनीतिक क्षमताओं के लिए। जब 1982 में नरेंदर मोदी और अमित शाह अहमदाबाद के एक संघ कार्यक्रम में मिले तो उसके अगले वर्ष उन्होंने 1983 में अमित शाह को भी ABVP में शामिल करवा लिया। उस समय नरेंदर मोदी की उम्र 33 वर्ष और अमित शाह की सिर्फ 19 वर्ष के थे। 1985 में नरेंदर मोदी भाजपा में जाने का मन बना चुके थे तो 1986 में अपने भाजपा में जाने के बाद उन्होंने अमित शाह को भी भाजपा में शामिल कराया। नरेंदर मोदी व अमित शाह के बीच राजनीतिक समझ उस समय से ही स्पष्ट थी, वह अमित शाह की खूबियां को अच्छे से जानते थे

गुजरात भाजपा में मोदी का बढ़ता कद

भाजपा में शामिल होने के बाद 1985 -1995 तक नरेंद्र मोदी का कद जैसे जैसे बढ़ता गया। नरेंद्र मोदी ने अमित शाह को वैसे वैसे ऊपर उठाया (जब 1996 में वे दिल्ली भेजे गए तो अमित शाह को गुजरात स्टेट फाइनेंस कारपोरेशन का चेयरमैन बनवाया)। गुजरात में भाजपा की जड़ें मजबूत करने के लिए उन्होंने अमित शाह के साथ मिलकर गुप्त रूप से ” कांग्रेस मुक्त गुजरात ” अभियान की शुरुआत की।

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कांग्रेस मुक्त गुजरात

महान नेता अपने से पहले अपना आधार मजबूत करते हैं, और नरेंद्र मोदी और अमित शाह की राजनैतिक कौशलता का अंदाजा यहीं से लगाया जा सकता हैकेशुभाई पटेल के मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने पार्टी का आधार मजबूत किया। नरेंद्र मोदी और अमित शाह की राजनैतिक कूटनीति से ही उन्होंने कांग्रेस के मजबूत ग्रामीण वोट बैंक, सहकारी संस्थाओं पर कांग्रेस का नियंत्रण व गुजरात खेल संघों में मजबूत कांग्रेसी पकड़ को कमजोर किया और कांग्रेस को ग्रामीण क्षेत्रों से निकालकर भाजपा को मजबूत किया।

नरेंदर मोदी गुजरात निकाला से दिल्ली

जब शकर सिंह बाघेला 1996 में लोकसभा चुनाव में हारे तो उन्होंने पार्टी से बगावत कर दी और कांग्रेस के समर्थन से मुख्यमंत्री बन गएजिसकी सजा नरेंदर मोदी को मिली और उन्हें गुजरात से दिल्ली पार्टी सचिव बना कर भेज दिया गया। परन्तु अमित शाह ने गुजरात में अपने आप को लगातार मजबूत किया पूर्ण रूप से कांग्रेस के आधार को कमजोर करने में लगे रहे।
नरेदर मोदी की अनुपस्थिति में उन्होंने 1999 में अहमदाबाद के जिला सहकारी बैंक का चुनाव जीतकर उसके अध्यक्ष बने। यह चुनाव इस लिए भी जरूरी था क्योकि यह चुनाव किसी बनिया के लिए जीतना बहुत ही मुश्किल था। वो इसलिए क्योकि इस चुनाव में पटेल , गड़रिया व क्षत्रियों का बोलबाला रहता था। 1997 के विधानसभा उपचुनाव में अमित शाह नरेंदर मोदी की अनुपस्थिति में विधानसभा पहुंचे।

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गुजरात में मोदी के जासूस

अमित शाह नरेंदर मोदी की अनुपस्थिति में गुजरात की राजनीति से जुडी हर खबर नरेंदर मोदी तक पहुंचाते थे। नरेंदर मोदी भले ही वर्षों तक दिल्ली रहे, परन्तु अपने कुशल राजनैतिक कौशलों व संघठन क्षमता के कारण, वह गुजरात से सम्बंधित हर खबर पर नजर बनाये हुए थे।

दोस्ती का कारण स्वार्थ या कुछ और

नरेंदर मोदी एक कुशल संगठन कर्ता है, उन्होंने कुछ समय में ही अमित शाह की कौशलताओं को पूर्ण रूप से पहचान लिया, 1995 में अमित शाह ने नरेंदर मोदी से कहा था आप देश के प्रधानमंत्री बनने की तैयारी करें। इस घटना से आप अंदाजा लगा सकते है की अमित शाह की कौशलताओं व नीति निर्माण का। उत्तर प्रदेश चुनाव में अमित शाह के साथ रहने वाले लोगों का कहना है की अमित शाह का दिमाग मशीन गन की तरह चलता हैवह जब तक जीत नहीं मानते और ना ही अपने कार्यकर्ताओं को जीत मनाने देते जब तक की सरकारी ऐलान न हो जाए। इसका पता इससे भी लगता है की अमित शाह लगातार 1997 से विधायक है, और हर बार उनकी जीत पिछली जीत से बड़ी होती है। क्योकि नरेंद्र मोदी और अमित शाह अपने अपने क्षेत्र के कुशल व्यक्ति है तो इनमे मित्रता ज्यादा हैइनमें स्वार्थ नाम की कोई चीज नहीं है। अगर होती तो गुजरात में नरेंद्र मोदी के बाद अमित शाह मुख्यमंत्री बनाये जातेअमित शाह अपने जीवन में 42 चुनाव लड़े जिनमें से एक भी नहीं हारे

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